Wednesday, March 2, 2011

उज्जैन की यादे...

आओ लौट चले उन पिछली यादों में...
जीया करते थे जब हम उन्मादों मे...

याद आती है क्षिप्रा नदी की शाम...
और वो मेघदूत की पार्टी में झाम...

चौपाटी पर करने को जाते सब सैर...
नयन-सुख उठाए और लौटे खाए बगैर...

याद आती है डालु की कचोरी-चाय...
1-1 रुपये का जब हिसाब मिलाए...

और कुछ ना मिले अपने कॅंटीन मे हाय...
पूरन और कालू के ताज़े समोसे खाए...

शिवानी भी हमें बहुत याद आए...
वही थी जो हमें पास करवाए...

हर पेपर के बाद महाकाल जाए...
और किसी को वही अकेले छोड़ आए...

रिज़ल्ट के पोहे महीनो बाँटे जाए...
जो उम्मीद ना हो वैसे नंबर पाए...

कुछ ऐसी ही उज्जैन की यादे सताए...
क्यूँ ना फिर सब मिल ये दोहराए...

द्वारा - सौरभ बजाज 

Thursday, December 2, 2010

कुछ तुम कहो... कुछ हम कहे...

कुछ तुम कहो...
कुछ हम कहे...
सिलसिला सदा चलता रहे..
है फिर भी कितनी...
अनकही बाते...
हर पल मन मचलता रहे..
दूर हो हम...
या पास रहे...
दिल तो फिर भी तड़पता रहे...
कुछ तुम कहो...
कुछ हम कहे...
सिलसिला सदा चलता रहे..

द्वारा - सौरभ बजाज

Tuesday, November 30, 2010

कि तेरा ज़िक्र है, या इत्र है...

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कि तेरा ज़िक्र है, या इत्र है...
जब जब करता हूँ...
महकता हूँ...
बहकता हूँ...
चहकता हूँ...
तेरी फ़िक्र है, या फक्र है...
जब जब करता हूँ...
मचलता हूँ...
उछलता हूँ...
फिसलता हूँ...
पागल की तरह,
मस्तियों में टहलता हूँ...
कि तेरा ज़िक्र है, या इत्र है...

Monday, November 29, 2010

Breathless...

I am Breathless...

कोई जो मिला तो मुझे ऐसा लगता हैं...
जैसे मेरी सारी दुनिया मैं गीतों की रुत...
और रंगों की बरखा है खुश्बू की आँधी है...
महकी हुई सी अब सारी फ़िज़ाए हैं...
बहकी हुई सी अब सारी हवाएँ हैं...
खोई हुई सी अब सारी दिशाएं हैं...
बदली हुई से अब सारी अदाएँ हैं...
जागी उमंगे हैं, धड़क रहा है दिल...
सपनों मे तूफान हैं, होठों पे नगमे हैं...
आखों मैं सपने हैं, सपनों मैं बीते हुए...
से वो सारे लम्हे हैं...